मै उर्दू सा कठिन नहीं। (हिंदी कविता)

  • मै उर्दू सा कठिन नहीं, गर समझो तुम अल्फ़ाज़ मेरे,

हर शब्द में है एक खनक भरी, हर लफ्ज़ में है जज़्बात मेरे,
जो तुम समझो तो गौहर जैसी है हर बात मेरी,
जो ना समझो तो सच मानो बस मिट्टी है एहसास मेरे।

तुम रहती हो दूर बहुत, कभी आ जाओ ना पास मेरे,
पल भर में धुआं कर दो मिल कर सब संत्रास मेरे,
तुम मुझको पागल समझो, या समझो तुम बकवास मुझे,
पर सच कहता हूं प्रिये, तुम ही हो बस खास मेरे।

कब से बैठा हूं अंखियां मिंचे, तुम आओगी है विश्वास मुझे,
बढ़ रही विरह की अग्नि है, है प्रिये मिलन की आस मुझे,
दिल का आंगन खुला पड़ा है उम्मीदों में
मिल जाए इस अंधियारे में तेरा प्रेम प्रकाश मुझे।

तुम ही हो सागर गहरा, तुम ही हो कैलाश मेरे,
तुम ही हो धरती मेरी, तुम ही हो आकाश मेरे,
तुम वर्षा बन कर बरसो ऐसे, भीग उठे मेरा बनकर मन,
कब से आस में बैठा हूं, लग जाए प्रेम की प्यास मुझे।

Sk mishra (निश्च्छल)

Leave a comment