मुहब्बत फिर से करने का इरादा कर लिया मैंने,
दिखी फिर जो कोई, उसी से वादा कर लिया मैंने।
खुद को बर्बाद करने का चढ़ा फितूर कुछ ऐसा,
कि इस बार इश्क बहुत ज्यादा कर लिया मैंने।
जो कम पड़ी खुशियां तो दामन भर दिया उनका,
लो खुद की खुशियों को भी आधा कर लिया मैंने।
उन्ही का शौक था कि जिंदगी शतरंज बन जाए मेरी,
उन्हें रानी बनाकर खुद को प्यादा कर लिया मैंने।
पता तो था मझे भी इश्क में रोना पड़ेगा रात भर,
फिर भीे नशा ए इश्क हद से ज्यादा कर लिया मैंने।
sk मिश्रा (निश्च्छल)